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खराब हाजमा और बीमारियां -1

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खराब हाजमा और बीमारियां- 1 संधिवात के कारण आज के दौर की सबसे बड़ी कड़वी सच्चाई यही है। जिसे आधुनिक विज्ञान 'लाइफस्टाइल डिसऑर्डर' कहता है, उसे ही आयुर्वेद और यूनानी में प्रज्ञापराध' (जानबूझकर की गई गलती) और विरुद्ध आहार का नतीजा माना गया है। जब खाने-पीने का कोई नियम नहीं रहता, तो शरीर का पूरा निजाम दरहम-बरहम (असंतुलित) हो जाता है। आइए देखें कि आज की यह खराब लाइफस्टाइल और खान-पान जोड़ों को किस तरह खोखला कर रहे हैं:  1. मंदाग्नि और 'आम' (Toxins) का निर्माण आजकल लोग भूख लगे बिना खा लेते हैं, देर रात भारी खाना खाते हैं, या फिर मैदा, डिब्बाबंद (Processed) भोजन और फास्ट फूड का कसरत से इस्तेमाल करते हैं।  नतीजा: इससे पेट की अग्नि (Metabolism) मंद पड़ जाती है। खाना पचने की बजाय सड़ने लगता है, जिससे आम' (Toxins) पैदा होता है। यही 'आम' जब खून के जरिए जोड़ों में पहुंचता है, तो आमवात (Rheumatoid Arthritis) की शक्ल अख्तियार कर लेता है।  2. विरुद्ध आहार (Wrong Food Combinations) दूध के साथ मछली या नमक का सेवन, ठंडी और गर्म चीजें एक साथ खाना (जैसे गरमा-गरम स...

सूरन (जिमीकंद) के फायदे

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सूरन (suran) जमीन में होने वाली कन्द है, इसलिए इसे `जमीकन्द´ कहते है। सूरन के पौधे बिना तने के बड़े-बडे पत्तों वाले होते हैं। इसके कन्द में पन्खुडियां बाहर निकलती है और ऊपर जाते-जाते इसके पत्ते छाते की तरह विशाल रूप धारण कर लेती है। सूरन दो तरह की होती है। पहली खुजली वाली और दूसरी मीठी वाली। खुजली वाली सूरन का सेवन करने से मुंह में चरपराहट होती है और मुंह सूज जाता है। इस तरह का सूरन का कन्द चिकना होता है और उसका सन्वर्धन कद के छोटे-छोटे टुकड़े करके होते है।यह मुंह और गले में चराचराहट करती है। इसकी पैदावर अधिक होती है। इसको उबालने से उसकी चराचराहट कम होती है। मीठी किस्म का सूरन का संवर्धन उपकन्दों से होता है। मीठी किस्म का गुण ज्यादा अच्छा होता है। इससे चराचराहट नही होती है। इसके गर्भ का रंग फीका गुलाबी अथवा सफेद होता है। मीठी तरह का सूरन साग के लिए और चराचराहट वाली सूरन का औषधि के रूप में उपयोग होता है।मस्से यानि बवासीर के रोग में यह बहुत ही गुणकारी है। इसीलिए संस्कृत भाषा में इसे अर्शहन का नाम दिया गया है। सूरन(suran) का साग बवासीर के रोगियों के लिए लाभकारी होता है।वैज्ञान...

खून की कमी (Anemia)

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*अक्सर नाखून सफेद और चेहरे पर सफेदी होती है ये खास लक्षण होते है* *आप फोटो में देख सकते है पहले नाखून सफेद थे अब इलाज के बाद लाल हो गए है* *खून की कमी (Anemia/रक्तक्षय)* होने पर शरीर के अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे कई गंभीर बीमारियां और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। खून की कमी से होने वाले मुख्य रोग और जटिलताएं निम्नलिखित हैं: ### **1. प्रमुख प्रकार के एनीमिया (Main Types of Anemia)**  * **आयरन की कमी (Iron Deficiency Anemia):** यह सबसे सामान्य है। शरीर में आयरन कम होने से हीमोग्लोबिन नहीं बन पाता।  * **विटामिन की कमी (Vitamin Deficiency Anemia):** विटामिन B12 और फोलेट (Folic Acid) की कमी से लाल रक्त कोशिकाएं (RBC) ठीक से नहीं बन पातीं। इसे **पर्निसियस एनीमिया** (Pernicious Anemia) भी कहते हैं।  * **सिकल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anemia):** यह एक आनुवंशिक (Genetic) बीमारी है जिसमें खून की कोशिकाएं दरांती (Sickle) के आकार की हो जाती हैं और जल्दी नष्ट होने लगती हैं।  * **अप्लास्टिक एनीमिया (Aplastic Anemia):** इसमें शरीर की अस्थि ...

कैंसर से लड़ने वाले आहार - Food For Cancer

*#कैंसर से लड़ने वाले आहार-1#* बहुत सारे निसर्गोपचार तज्ञों – डंकन बल्क्ली , ए होगल, मैक्स गर्सन, क्रिस्टीन नोल्फी, रगनर बर्ग इनके अनुसार अयोग्य आहार ही कैंसर का मूल कारण है । कैंसर को प्रकट होने में कई साल लगते हैं तो उसकी शुरुआत से लेकर प्रकट होने तक हर पड़ाव में कैंसर की रासायनिक श्रृंखला को तोड़ा जा सकता है। एन्टीऑक्सिडंटस् प्रति ऑक्सिकारक उदा. – ✍🏻 *जीवनसत्त्वों से कर्ककारक पदार्थों को नष्ट किया जा सकता है।* ☘️आहार जीवनसत्त्वों से खराब हुए पेशी दुरूस्त होती है।🌿 📢कैंसर की वृद्धि को रोका जा सकता है।📢 🔴जो अंतिम अवस्था में है उनकी जीवन आयु बढ़ाई जा सकती है। *#कैंसर के लिए काल है यह फल और सारी सब्जियाँ :#* आहार में जितने ज्यादा फल और सब्जियाँ उतना कैंसर होने की संभावना कम होती है। फल और सब्जियों का सेवन जो ज्यादा करते हैं उन्हें कम फल और सब्जियों को सेवन करनेवालों से कैंसर होने की संभावना कम होती है। जो _*धुम्रपान*_ करते हैं वह यदि दिन में दो बार फल खाए या तीन प्रकार की कच्ची सब्जियाँ खाए तो 75 प्रतिशत से कैंसर होने का खतरा टाला जा सकता है। धूम्रपान करने वालों को रक्तनलिकाओं की क...

गर्दन का साइटिका

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📌 *गर्दन का साइटिका* (Cervical Radiculopathy) क्या है? जब गर्दन की हड्डियों (Vertebrae) के बीच से निकलने वाली नसों पर दबाव पड़ता है, तो इसे सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी कहते हैं। आम भाषा में इसे *गर्दन का साइटिका* या _*नस दबना*_ भी कहा जाता है, क्योंकि दर्द बिजली के झटके जैसा महसूस होता है। ⚠️ मुख्य लक्षण • गर्दन से कंधे व हाथों तक झनझनाहट • गर्दन हिलाने पर हाथ में करंट जैसा दर्द • हाथ या उंगलियों में सुन्नपन • हाथ से सामान पकड़ने में कमजोरी ❗ प्रमुख कारण • स्लिप डिस्क • सर्वाइकल स्पॉन्डायलोसिस • मोबाइल/कंप्यूटर का गलत पोस्चर • गलत तरीके से सोना • *ज्यादा देर तक 2/3/4/5/6 व्हीलर ड्राइविंग*  • *मां और बेटी, बहनों का ज्यादा देर तक रोटी पकाना* 🌿 आयुर्वेद में सुरक्षित व प्रभावी उपचार उपलब्ध है बिना साइड इफेक्ट, जड़ से इलाज के लिए संपर्क करें। 👨‍⚕️ Dr. / Hakeem Jamir S. Shaikh (D.U.M.S., MLVV Delhi) Gausiya Ayurvedalaya 🕘 OPD Time 🌅 सुबह: 10:00 से 2:00 तक 🌙 शाम: 6:00 से 9:00 तक 📞 9370491556

sandhivaat ke lakshan

*संधिवात (Sandhivaat / Osteoarthritis) के प्रमुख लक्षण* *_आम लक्षण_* 1:-जोड़ों में दर्द (चलने-फिरने या मेहनत के बाद बढ़ता है) 2:-जकड़न (खासकर सुबह या आराम के बाद) 3:-जोड़ों में सूजन 4:-हिलाने-डुलाने पर कटकट/चरमराहट की आवाज 5:-चलने, सीढ़ियाँ चढ़ने-उतरने में कठिनाई :-देर तक खड़े रहने पर दर्द बढ़ना 6:-उन्नत अवस्था के लक्षण जोड़ों की गतिशीलता कम हो जाना 7:-घुटनों/कमर/कूल्हे में स्थायी दर्द 8:-जोड़ का आकार बदलना (डिफॉर्मिटी) 9:- *मौसम बदलने पर दर्द बढ़ना* दर्द के कारण नींद में बाधा अधिक प्रभावित जोड़ A:-घुटना (Knee) B:-कमर/रीढ़ (Lumbar spine) C:-कूल्हा (Hip) D:-गर्दन (Cervical) E:-हाथ-उँगलियाँ *_पूरी तरह संधिवात हम ठीक करते है सम्पर्क करे_* Share & forword  *ये पोस्ट सिर्फ जानकारी के लिए हैं कोई भी जड़ी बूटियां इस्तेमाल से पहले अपने हकिम या वैद्य से जानकारी जरूर लीजिए पोस्ट के दुरुपयोग के लिए गौसिया एंटरप्राइजेज - हकिम जमीर शेख जिम्मेदार नहीं* *_(खुद से दवाइया/जड़ी बूटियां इस्तेमाल करना हानिकार हो सकता है)_* _*आयुर्वेदिक सलाह और उपचार के लिये संम्पकर करे*_ *_Hakeem Jamir S. Shai...

mardana kamjori ke karan -1

*कमजोरी के कारण* अक्सर आप पड़ते होगे की बचपन की गलतियों के कारण शारीरिक कमजोरी स्त्रियों और पुरुषों को आती हैं लेकिन मेरा तजुरबा और भी है (1) जिस्म में गरमास बड़ने से यानी पित्त बड़ने से (2) पित्त कुपित होने से (3) प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होने से (4) खून की कमी होने से (5) पाचन तंत्र की कमजोरी से (6) गंदे विचारो से ..........etc.(वगैर) *_(अब जाड़े का मौसम यानी ठंडी का मौसम है और ऐसे मौसम में शरीर कमजोरी/ या ताकत की दवाइयां खाना बहोत जल्दी असर करती है और साल भर की energy stor hoti है)_* १)दरसल लोग अंग्रेजी दवाई इस्तमाल करके और भी मुसीबात मोल लेते है  २)दूसरा ठीक से निष्कर्ष ना होने से  हकीम / वैद्य/डॉक्टर सिर्फ बाजीकरन(timing) की दवाइयां देते है जो लिमिटेड कुछ वक्त के लिए फायदा करती है लेकिन जड़ से का मर्ज ठीक नही होता ३)मर्दों की तरह औरतों में भी लिकोरिया जैसी और श्वेत प्रदर और लाल पदार जैसी बीमारियां होती है  देखा गया है की ऐसे मरीजों को सर दर्द, कमर दर्द, घुटना दर्द की शिकायत ज्यादा होती है  और ज्यादा थकान, मानसिक चिड़चिड़ापन, गर्दन तथा मनके में भी दर्द रहता है...