Posts

पुनर्नवा के फ़ायदे

Image
प्रायः पुनर्नवा (विषखपरा) को सभी लोग जानते हैं । यह क्षुप जाति की बेल वर्षा ऋतु में ही फैलती है। आयुर्वेद मतानुसार पुष्प के वर्ण भेद से यह तीन प्रकार की होती है-1. श्वेत, 2. लाल और, 3. नीली पुनर्नवा । इनमें श्वेत और रक्त पुनर्नवा बहुतायत से देखने में आती है । औषधि रूप में श्वेत पुनर्नवा विशेष गुणकारी सिद्ध हो चुकी है । इसकी उत्पत्ति कंकरीली और मिट्टी मिली हुई ताकतवर जमीन में होती है । खोदने पर मिट्टी की ताकत के हिसाब से (शकरबन्द के समान) मोटी या पतली (1-2 फुट तक लम्बी) जड़ पाई जाती है। जिस जगह से इसकी जड़ काट दी जाती है, वहाँ एक प्रकार का पीलापन लिए हुए चेप निकलता है। (यह चॅप वस्त्रों में धब्बा डाल देता है) इस कन्द का स्वाद मीठा न होकर कड़वा रहता है । मुख में डालने पर थूक पैदा कर देता है तथा इसको मुख से निकाल देने पर 15-20 मिनट तक ज़ीभ कड़ी और रूखी हो जाती है। पुनर्नवा के पत्तों का रस गरम होता है। इसकी लुगदी में ताम्र होता है। इसका अर्क समस्त प्रकार के नेत्रों के रोगों को नष्ट करने वाला हो जाता है। यदि इसका अधिक मात्रा में सेवन किया जाए तो वमन हो जाता है इसकी पत्ता की भाजी ...

अडूसा है 50 से भी अधिक रोगों की रामबाण | Adusa Plant Benefits In Hindi

अडूसा क्या है ? : अडूसा एक बहु उपयोगी आयुर्वेदिक वनस्पति है। सारे भारत में अडूसा के झाड़ीदार पौधे आसानी से मिल जाते हैं। ये 120 से 240 सेमी ऊंचे होते हैं। अडूसा (adusa)के पत्ते 7.5 से 20 सेमी तक लंबे और 4 से साढ़े 6 सेमी चौडे़ अमरूद के पत्तों जैसे होते हैं। ये नोकदार, तेज गंधयुक्त, कुछ खुरदरे, हरे रंग केअडूसा एक आयुर्वेदिक औषधी है जो 120 से 240 सेमी ऊंचे होते हैं। अडूसा (adusa)के पत्तों, अमरूद के पत्ते के समान 7.5 से 20 सेमी तक लंबे और 4 से साढ़े 6 सेमी चौडे़ होते हैं। होते हैं। अडूसा के पत्तों को कपड़ों और पुस्तकों में रखने पर कीड़ों से नुकसान नहीं पहुंचता। इसके फूल सफेद रंग के 5 से 7.5 सेमी लंबे और हमेशा गुच्छों में लगते हैं। लगभग 2.5 सेमी लंबी इसकी फली रोम सहित कुछ चपटी होती है, जिसमें चार बीज होते हैं। तने पर पीले रंग की छाल होती है। अडूसा की लकड़ी में पानी नहीं घुसने के कारण वह सड़ती नहीं है। अडूसा के विभिन्न भाषाओं में नाम : संस्कृत वासा, वासक, अडूसा, विसौटा, अरूष। हिंदी अडूसा, विसौटा, अरूष। मराठी अडूलसा, आडुसोगे। गुजराती अरडूसों, अडूसा, अल्डुसो। बंगाली वासक, ...

खराब हाजमा और बीमारियां -1

Image
खराब हाजमा और बीमारियां- 1 संधिवात के कारण आज के दौर की सबसे बड़ी कड़वी सच्चाई यही है। जिसे आधुनिक विज्ञान 'लाइफस्टाइल डिसऑर्डर' कहता है, उसे ही आयुर्वेद और यूनानी में प्रज्ञापराध' (जानबूझकर की गई गलती) और विरुद्ध आहार का नतीजा माना गया है। जब खाने-पीने का कोई नियम नहीं रहता, तो शरीर का पूरा निजाम दरहम-बरहम (असंतुलित) हो जाता है। आइए देखें कि आज की यह खराब लाइफस्टाइल और खान-पान जोड़ों को किस तरह खोखला कर रहे हैं:  1. मंदाग्नि और 'आम' (Toxins) का निर्माण आजकल लोग भूख लगे बिना खा लेते हैं, देर रात भारी खाना खाते हैं, या फिर मैदा, डिब्बाबंद (Processed) भोजन और फास्ट फूड का कसरत से इस्तेमाल करते हैं।  नतीजा: इससे पेट की अग्नि (Metabolism) मंद पड़ जाती है। खाना पचने की बजाय सड़ने लगता है, जिससे आम' (Toxins) पैदा होता है। यही 'आम' जब खून के जरिए जोड़ों में पहुंचता है, तो आमवात (Rheumatoid Arthritis) की शक्ल अख्तियार कर लेता है।  2. विरुद्ध आहार (Wrong Food Combinations) दूध के साथ मछली या नमक का सेवन, ठंडी और गर्म चीजें एक साथ खाना (जैसे गरमा-गरम स...

सूरन (जिमीकंद) के फायदे

Image
सूरन (suran) जमीन में होने वाली कन्द है, इसलिए इसे `जमीकन्द´ कहते है। सूरन के पौधे बिना तने के बड़े-बडे पत्तों वाले होते हैं। इसके कन्द में पन्खुडियां बाहर निकलती है और ऊपर जाते-जाते इसके पत्ते छाते की तरह विशाल रूप धारण कर लेती है। सूरन दो तरह की होती है। पहली खुजली वाली और दूसरी मीठी वाली। खुजली वाली सूरन का सेवन करने से मुंह में चरपराहट होती है और मुंह सूज जाता है। इस तरह का सूरन का कन्द चिकना होता है और उसका सन्वर्धन कद के छोटे-छोटे टुकड़े करके होते है।यह मुंह और गले में चराचराहट करती है। इसकी पैदावर अधिक होती है। इसको उबालने से उसकी चराचराहट कम होती है। मीठी किस्म का सूरन का संवर्धन उपकन्दों से होता है। मीठी किस्म का गुण ज्यादा अच्छा होता है। इससे चराचराहट नही होती है। इसके गर्भ का रंग फीका गुलाबी अथवा सफेद होता है। मीठी तरह का सूरन साग के लिए और चराचराहट वाली सूरन का औषधि के रूप में उपयोग होता है।मस्से यानि बवासीर के रोग में यह बहुत ही गुणकारी है। इसीलिए संस्कृत भाषा में इसे अर्शहन का नाम दिया गया है। सूरन(suran) का साग बवासीर के रोगियों के लिए लाभकारी होता है।वैज्ञान...

खून की कमी (Anemia)

Image
*अक्सर नाखून सफेद और चेहरे पर सफेदी होती है ये खास लक्षण होते है* *आप फोटो में देख सकते है पहले नाखून सफेद थे अब इलाज के बाद लाल हो गए है* *खून की कमी (Anemia/रक्तक्षय)* होने पर शरीर के अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे कई गंभीर बीमारियां और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। खून की कमी से होने वाले मुख्य रोग और जटिलताएं निम्नलिखित हैं: ### **1. प्रमुख प्रकार के एनीमिया (Main Types of Anemia)**  * **आयरन की कमी (Iron Deficiency Anemia):** यह सबसे सामान्य है। शरीर में आयरन कम होने से हीमोग्लोबिन नहीं बन पाता।  * **विटामिन की कमी (Vitamin Deficiency Anemia):** विटामिन B12 और फोलेट (Folic Acid) की कमी से लाल रक्त कोशिकाएं (RBC) ठीक से नहीं बन पातीं। इसे **पर्निसियस एनीमिया** (Pernicious Anemia) भी कहते हैं।  * **सिकल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anemia):** यह एक आनुवंशिक (Genetic) बीमारी है जिसमें खून की कोशिकाएं दरांती (Sickle) के आकार की हो जाती हैं और जल्दी नष्ट होने लगती हैं।  * **अप्लास्टिक एनीमिया (Aplastic Anemia):** इसमें शरीर की अस्थि ...

कैंसर से लड़ने वाले आहार - Food For Cancer

*#कैंसर से लड़ने वाले आहार-1#* बहुत सारे निसर्गोपचार तज्ञों – डंकन बल्क्ली , ए होगल, मैक्स गर्सन, क्रिस्टीन नोल्फी, रगनर बर्ग इनके अनुसार अयोग्य आहार ही कैंसर का मूल कारण है । कैंसर को प्रकट होने में कई साल लगते हैं तो उसकी शुरुआत से लेकर प्रकट होने तक हर पड़ाव में कैंसर की रासायनिक श्रृंखला को तोड़ा जा सकता है। एन्टीऑक्सिडंटस् प्रति ऑक्सिकारक उदा. – ✍🏻 *जीवनसत्त्वों से कर्ककारक पदार्थों को नष्ट किया जा सकता है।* ☘️आहार जीवनसत्त्वों से खराब हुए पेशी दुरूस्त होती है।🌿 📢कैंसर की वृद्धि को रोका जा सकता है।📢 🔴जो अंतिम अवस्था में है उनकी जीवन आयु बढ़ाई जा सकती है। *#कैंसर के लिए काल है यह फल और सारी सब्जियाँ :#* आहार में जितने ज्यादा फल और सब्जियाँ उतना कैंसर होने की संभावना कम होती है। फल और सब्जियों का सेवन जो ज्यादा करते हैं उन्हें कम फल और सब्जियों को सेवन करनेवालों से कैंसर होने की संभावना कम होती है। जो _*धुम्रपान*_ करते हैं वह यदि दिन में दो बार फल खाए या तीन प्रकार की कच्ची सब्जियाँ खाए तो 75 प्रतिशत से कैंसर होने का खतरा टाला जा सकता है। धूम्रपान करने वालों को रक्तनलिकाओं की क...

गर्दन का साइटिका

Image
📌 *गर्दन का साइटिका* (Cervical Radiculopathy) क्या है? जब गर्दन की हड्डियों (Vertebrae) के बीच से निकलने वाली नसों पर दबाव पड़ता है, तो इसे सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी कहते हैं। आम भाषा में इसे *गर्दन का साइटिका* या _*नस दबना*_ भी कहा जाता है, क्योंकि दर्द बिजली के झटके जैसा महसूस होता है। ⚠️ मुख्य लक्षण • गर्दन से कंधे व हाथों तक झनझनाहट • गर्दन हिलाने पर हाथ में करंट जैसा दर्द • हाथ या उंगलियों में सुन्नपन • हाथ से सामान पकड़ने में कमजोरी ❗ प्रमुख कारण • स्लिप डिस्क • सर्वाइकल स्पॉन्डायलोसिस • मोबाइल/कंप्यूटर का गलत पोस्चर • गलत तरीके से सोना • *ज्यादा देर तक 2/3/4/5/6 व्हीलर ड्राइविंग*  • *मां और बेटी, बहनों का ज्यादा देर तक रोटी पकाना* 🌿 आयुर्वेद में सुरक्षित व प्रभावी उपचार उपलब्ध है बिना साइड इफेक्ट, जड़ से इलाज के लिए संपर्क करें। 👨‍⚕️ Dr. / Hakeem Jamir S. Shaikh (D.U.M.S., MLVV Delhi) Gausiya Ayurvedalaya 🕘 OPD Time 🌅 सुबह: 10:00 से 2:00 तक 🌙 शाम: 6:00 से 9:00 तक 📞 9370491556