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कैंसर से लड़ने वाले आहार - Food For Cancer

*#कैंसर से लड़ने वाले आहार-1#* बहुत सारे निसर्गोपचार तज्ञों – डंकन बल्क्ली , ए होगल, मैक्स गर्सन, क्रिस्टीन नोल्फी, रगनर बर्ग इनके अनुसार अयोग्य आहार ही कैंसर का मूल कारण है । कैंसर को प्रकट होने में कई साल लगते हैं तो उसकी शुरुआत से लेकर प्रकट होने तक हर पड़ाव में कैंसर की रासायनिक श्रृंखला को तोड़ा जा सकता है। एन्टीऑक्सिडंटस् प्रति ऑक्सिकारक उदा. – ✍🏻 *जीवनसत्त्वों से कर्ककारक पदार्थों को नष्ट किया जा सकता है।* ☘️आहार जीवनसत्त्वों से खराब हुए पेशी दुरूस्त होती है।🌿 📢कैंसर की वृद्धि को रोका जा सकता है।📢 🔴जो अंतिम अवस्था में है उनकी जीवन आयु बढ़ाई जा सकती है। *#कैंसर के लिए काल है यह फल और सारी सब्जियाँ :#* आहार में जितने ज्यादा फल और सब्जियाँ उतना कैंसर होने की संभावना कम होती है। फल और सब्जियों का सेवन जो ज्यादा करते हैं उन्हें कम फल और सब्जियों को सेवन करनेवालों से कैंसर होने की संभावना कम होती है। जो _*धुम्रपान*_ करते हैं वह यदि दिन में दो बार फल खाए या तीन प्रकार की कच्ची सब्जियाँ खाए तो 75 प्रतिशत से कैंसर होने का खतरा टाला जा सकता है। धूम्रपान करने वालों को रक्तनलिकाओं की क...

गर्दन का साइटिका

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📌 *गर्दन का साइटिका* (Cervical Radiculopathy) क्या है? जब गर्दन की हड्डियों (Vertebrae) के बीच से निकलने वाली नसों पर दबाव पड़ता है, तो इसे सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी कहते हैं। आम भाषा में इसे *गर्दन का साइटिका* या _*नस दबना*_ भी कहा जाता है, क्योंकि दर्द बिजली के झटके जैसा महसूस होता है। ⚠️ मुख्य लक्षण • गर्दन से कंधे व हाथों तक झनझनाहट • गर्दन हिलाने पर हाथ में करंट जैसा दर्द • हाथ या उंगलियों में सुन्नपन • हाथ से सामान पकड़ने में कमजोरी ❗ प्रमुख कारण • स्लिप डिस्क • सर्वाइकल स्पॉन्डायलोसिस • मोबाइल/कंप्यूटर का गलत पोस्चर • गलत तरीके से सोना • *ज्यादा देर तक 2/3/4/5/6 व्हीलर ड्राइविंग*  • *मां और बेटी, बहनों का ज्यादा देर तक रोटी पकाना* 🌿 आयुर्वेद में सुरक्षित व प्रभावी उपचार उपलब्ध है बिना साइड इफेक्ट, जड़ से इलाज के लिए संपर्क करें। 👨‍⚕️ Dr. / Hakeem Jamir S. Shaikh (D.U.M.S., MLVV Delhi) Gausiya Ayurvedalaya 🕘 OPD Time 🌅 सुबह: 10:00 से 2:00 तक 🌙 शाम: 6:00 से 9:00 तक 📞 9370491556

sandhivaat ke lakshan

*संधिवात (Sandhivaat / Osteoarthritis) के प्रमुख लक्षण* *_आम लक्षण_* 1:-जोड़ों में दर्द (चलने-फिरने या मेहनत के बाद बढ़ता है) 2:-जकड़न (खासकर सुबह या आराम के बाद) 3:-जोड़ों में सूजन 4:-हिलाने-डुलाने पर कटकट/चरमराहट की आवाज 5:-चलने, सीढ़ियाँ चढ़ने-उतरने में कठिनाई :-देर तक खड़े रहने पर दर्द बढ़ना 6:-उन्नत अवस्था के लक्षण जोड़ों की गतिशीलता कम हो जाना 7:-घुटनों/कमर/कूल्हे में स्थायी दर्द 8:-जोड़ का आकार बदलना (डिफॉर्मिटी) 9:- *मौसम बदलने पर दर्द बढ़ना* दर्द के कारण नींद में बाधा अधिक प्रभावित जोड़ A:-घुटना (Knee) B:-कमर/रीढ़ (Lumbar spine) C:-कूल्हा (Hip) D:-गर्दन (Cervical) E:-हाथ-उँगलियाँ *_पूरी तरह संधिवात हम ठीक करते है सम्पर्क करे_* Share & forword  *ये पोस्ट सिर्फ जानकारी के लिए हैं कोई भी जड़ी बूटियां इस्तेमाल से पहले अपने हकिम या वैद्य से जानकारी जरूर लीजिए पोस्ट के दुरुपयोग के लिए गौसिया एंटरप्राइजेज - हकिम जमीर शेख जिम्मेदार नहीं* *_(खुद से दवाइया/जड़ी बूटियां इस्तेमाल करना हानिकार हो सकता है)_* _*आयुर्वेदिक सलाह और उपचार के लिये संम्पकर करे*_ *_Hakeem Jamir S. Shai...

mardana kamjori ke karan -1

*कमजोरी के कारण* अक्सर आप पड़ते होगे की बचपन की गलतियों के कारण शारीरिक कमजोरी स्त्रियों और पुरुषों को आती हैं लेकिन मेरा तजुरबा और भी है (1) जिस्म में गरमास बड़ने से यानी पित्त बड़ने से (2) पित्त कुपित होने से (3) प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होने से (4) खून की कमी होने से (5) पाचन तंत्र की कमजोरी से (6) गंदे विचारो से ..........etc.(वगैर) *_(अब जाड़े का मौसम यानी ठंडी का मौसम है और ऐसे मौसम में शरीर कमजोरी/ या ताकत की दवाइयां खाना बहोत जल्दी असर करती है और साल भर की energy stor hoti है)_* १)दरसल लोग अंग्रेजी दवाई इस्तमाल करके और भी मुसीबात मोल लेते है  २)दूसरा ठीक से निष्कर्ष ना होने से  हकीम / वैद्य/डॉक्टर सिर्फ बाजीकरन(timing) की दवाइयां देते है जो लिमिटेड कुछ वक्त के लिए फायदा करती है लेकिन जड़ से का मर्ज ठीक नही होता ३)मर्दों की तरह औरतों में भी लिकोरिया जैसी और श्वेत प्रदर और लाल पदार जैसी बीमारियां होती है  देखा गया है की ऐसे मरीजों को सर दर्द, कमर दर्द, घुटना दर्द की शिकायत ज्यादा होती है  और ज्यादा थकान, मानसिक चिड़चिड़ापन, गर्दन तथा मनके में भी दर्द रहता है...

गर्दन में दर्द से जुड़ी महत्त्वपूर्ण बातें

*गर्दन का दर्द (Neck Pain in Hindi)* ( *_इन सभी व्याधी पर समय लगता है पर जड़ से इलाज हमारे यहां होता है_*) कमर दर्द की तरह गर्दन दर्द ऐसी सामान्य समस्या है, जिसका सामना हर व्यक्ति को किसी-न-किसी रूप में अवश्य पड़ता है, लेकिन कई लोग लापरवाही अथवा नासमझी के कारण जीवन-भर की आफत मोल ले लेते हैं।  गर्दन दर्द के कारण :  प्रकृति ने हमारी गर्दन को इस तरह का लचीला बनाया है कि उसे शरीर के अन्य अंगों की तुलना में सबसे अधिक मोड़ा और घुमाया जा सके, लेकिन इस विशिष्ट व्यवस्था के कारण गर्दन अन्य अंगों की तुलना में नाजुक बन गई है। इस कारण मामूली चोट या झटके भी गर्दन में फ्रैक्चर या डिस्क खिसकने का कारण बन सकते हैं। उम्र बढ़ने पर गर्दन की हड्डी या उसकी डिस्क को कुछ-न-कुछ क्षति होती ही है और इस कारण हर व्यक्ति को अधिक उम्र होने पर किसी-न-किसी स्तर पर गर्दन दर्द का सामना करना पड़ता है। गर्दन की हड्डी (सर्वाइकल स्पाइन) रीढ़ का ही हिस्सा होती है । इसकी संरचना इस प्रकार की होती है, ताकि हम गर्दन को पीठ की तुलना में अधिक घुमा सकें। गर्दन दर्द का प्रमुख कारण गर्दन की डिस्क का लचीलापन घट जाना या उसका घ...

पित्त के लक्षण (pitta ke lakshman)-1

 *पित्त दोष* पित्त के लक्षण :  चक्कर आना, सबेरे नीला रंग खट्टा पानी मुंह से निकलना पित्त यानी गर्मी बढ़ने से जिस तरह दूध कुनकुना रहने से उसमे जीवाणु तेज़ गति से बढ़ते है और दही तुरंत जम जाता है ; वैसे ही शरीर में भी कीटाणु तेज़ी से पनपते है। इससे किसी भी तरह का इन्फेक्शन होने की पूरी संभावना होती है। अगर पित्त संतुलित हो तो शरीर किसी भी इन्फेक्शन से लड़कर ख़त्म कर देता है। गर्मी ज़्यादा होती है , पसीना अधिक आयेगा , चेहरा लाल या पीला दिख सकता है। दांत पीले रहेंगे और जल्दी सड़ने की संभावना रहेगी। गर्मी अधिक होने से सभी धातु पिघल कर बहेंगे। इससे बहता हुआ ज़ुकाम , अत्याधिक कफ वाली खांसी होने की संभावना होगी। श्वेत प्रदर , रक्त प्रदर आदि होने की संभावना रहेगी। गर्मी अधिक होने से ज़रूरी अंग जैसे किडनी खराब हो सकती है , हार्ट एन्लार्ज हो सकता है, बाल सफ़ेद हो सकते है। गर्मी अधिक होने से मुंह में दुर्गन्ध आ सकती है , पसीने में भी दुर्गन्ध आ सकती है। पित्त संतुलित हो तो कितना भी पसीना आये उसमे कोई गंध नहीं होगी। पिम्पल्स , फोड़े फुंसी आदि होने की संभावना बढ़ जाती है। सर दर्द , माइग्रेन...

नीम के 51 कमाल के फायदे

नीम के आयुर्वेदिक गुण : neem ke ayurvedic gun in hindi नीम सुप्रसिद्ध सर्वविदित सर्वत्र पाया जाने वाला त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) को दूर करने की अपार क्षमता से सुशोभित वृक्ष है । पुराणों में इसे अमृत तुल्य माना गया है। नीम वृक्ष का पान्चांग (फल, फूल, पत्ते, जड़ और छाल) का रेशा-रेशा अर्थात् जड़ से शिखर तक वृक्ष औषधीय गुणों से भरपूर है । यही इसके विशेष महत्त्व की बात है, ऐसा बहुत कम वृक्षों के साथ महत्व जुड़ा हुआ है । इसकी कोपलें नेत्र रोग, गर्मी, कोढ़ और कफ नाशक होते हैं । इसके पत्ते कृमि, विष, अरूचि और अजीर्ण नाशक होते हैं । इसके सूखे हुए पत्ते मनुष्य और कपड़ों (दोनों) की रक्षा करते हैं तथा अनाज में रखने से उसे भी घुनने (कृमियों) से बचाते हैं। इस वृक्ष के फल (निबौली) बबासीर, प्रमेह, कोढ़, कृमि और गुल्म को शान्त करते हैं। इसके पके फल (निबौली) रक्त, पित्त, कफ, नेत्र रोग, दमा नाशक है । इस वृक्ष का फूल (निबौली का फूल) कफ और कृमि नाशक है । इस वृक्ष का डन्ठल खाँसी, बबासीर, प्रमेह और कृमिजन्य विकार नाशक गुणों से भरपूर है । निबौली की गिरी कोढ़ में विशेष रूप से आरोग्यता प्रदान करने वाली है । नीम ...