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सूरन (जिमीकंद) के फायदे

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सूरन (suran) जमीन में होने वाली कन्द है, इसलिए इसे `जमीकन्द´ कहते है। सूरन के पौधे बिना तने के बड़े-बडे पत्तों वाले होते हैं। इसके कन्द में पन्खुडियां बाहर निकलती है और ऊपर जाते-जाते इसके पत्ते छाते की तरह विशाल रूप धारण कर लेती है। सूरन दो तरह की होती है। पहली खुजली वाली और दूसरी मीठी वाली। खुजली वाली सूरन का सेवन करने से मुंह में चरपराहट होती है और मुंह सूज जाता है। इस तरह का सूरन का कन्द चिकना होता है और उसका सन्वर्धन कद के छोटे-छोटे टुकड़े करके होते है।यह मुंह और गले में चराचराहट करती है। इसकी पैदावर अधिक होती है। इसको उबालने से उसकी चराचराहट कम होती है। मीठी किस्म का सूरन का संवर्धन उपकन्दों से होता है। मीठी किस्म का गुण ज्यादा अच्छा होता है। इससे चराचराहट नही होती है। इसके गर्भ का रंग फीका गुलाबी अथवा सफेद होता है। मीठी तरह का सूरन साग के लिए और चराचराहट वाली सूरन का औषधि के रूप में उपयोग होता है।मस्से यानि बवासीर के रोग में यह बहुत ही गुणकारी है। इसीलिए संस्कृत भाषा में इसे अर्शहन का नाम दिया गया है। सूरन(suran) का साग बवासीर के रोगियों के लिए लाभकारी होता है।वैज्ञान...